शनि राहु डबल ट्रांजिट वृश्चिक और मकर पर

वृश्चिक में राहु

वृश्चिक में राहु गतिविधि, दृढ़ता और सूक्ष्मता देता है, जो सफल होने के लिए व्यक्ति को सक्षम कर सकता है|

यह अच्छे स्वास्थ्य का संकेत भी है| सफलता हमेशा जल्दी नहीं मिलेगी, लेकिन बड़ी मुश्किलों के बाद आयेगी| खरीदी गई खुशी सभी लंबे समय तक सहन करेंगे।

मकर में राहु

एकांत से प्रेम करते हैं, लेकिन विद्वान चतुराई और कूटनीति के लिए झुकाव भी करते हैं।

स्वभाव उदासी से अधिक चिंतनशील है। यह स्थिति सांसारिक स्थिति में स्थिरता ला सकती है, लेकिन शायद ही कभी धन देता है|

घर प्रॉपरीज़ के माध्यम से लाभ की संभावना है मकर राशि में राहु मजबूत स्वास्थ्य और शारीरिक लचीलापन देता है|

वृश्चिक में शनि

वृश्चिक में शनि, “रहस्यमय, आक्रामक, अप्रत्याशित, विनाशकारी, घुसपैठ, विपत्तिपूर्ण, आकस्मिक, सर्जिकल, वृश्चिक की परिवर्तनकारी विशेषताएं” को न कहते हैं।

यद्यपि शनि वृश्चिक की छुपे आंदोलन, उसके यौवन रहस्यों, या छिपी हुई संपत्ति की खोज करने की क्षमता को रोक नहीं सकते, शनि इन व्यवहारों को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं|

शनि घुसपैठ का विरोध करते हैं शनि अचानक परिवर्तनों का विरोध करता है, भयावह परिवर्तन के बाद उभरता नई पहचान वह अनियमित, अप्रत्याशित, सहज, और अचानक से नफरत करता है – फिर भी ये वास्तव में वृश्चिका के कार्य हैं।

शनि अपनी पूरी कोशिश से रोकने का कार्य करता है| लेकिन सक्रिय, प्रतिस्पर्धी, आक्रामक मंगल के राशि में, प्रोफेसर शनि भयग्रस्त महसूस करते हैं और हमेशा एक युवा, खूनी प्रतिद्वंद्वी द्वारा हमले के अंतर्गत हैं। इसलिए वृश्चिक में शनि काफी कमजोर होती है। मनोवैज्ञानिक रूप से, शनि  हमेशा रक्षात्मक होता है|

मकर में शनि

शनि अच्छे हैं परन्तु वह अभी भी है शनि = सफलता केवल लंबी प्रक्रिया और काफी देरी के बाद आती है।

व्यक्ति इस के प्रभाव में एक सफलतापूर्वक पूरा किए गए परियोजनाओं का रिकॉर्ड बनाने का इरादा रखता है|

सरकार और नीति में रुचि आती है, आमतौर पर उम्मीद से प्रेरित है कि समस्याओं का प्रबंधन हो सकता है अगर बेहतर कानून प्रवर्तन के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है|

पोशाक और व्यवहार में पारंपरिक फैशन चाहता है इस लक्ष्य को वे जो कहा जाता है, उसके द्वारा प्राप्त करता है। कम से कम संघर्ष और अधिक से अधिक प्रोटोकॉल के साथ भौतिक रूप से आरामदायक वातावरण की तलाश करें|

 Watch “देव गुरू बृहस्‍पति का दानव गुरू शुक्र की राशि में परिवर्तन, Sept. 2017 to Oct. 2018, 1 वर्ष 1 माह” on YouTube

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*लेख अवश्य पढ़े*
*कर्ण ने कृष्ण से पूछा  –  मेरा जन्म होते ही मेरी माँ ने मुझे त्याग दिया। क्या अवैध संतान होना मेरा दोष था ?*

*द्रोणाचार्य ने मुझे सिखाया नहीं क्योंकि मैं क्षत्रिय पुत्र नहीं था।* 

*परशुराम जी ने मुझे सिखाया तो सही परंतु श्राप दे दिया कि जिस वक्त मुझे उस विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, मुझे उसका विस्मरण होगा।- क्योंकि उनके अनुसार मैं क्षत्रिय ही था ।* 

*केवल संयोगवश एक गाय को मेरा बाण लगा और उसके स्वामी ने मुझे श्राप दिया जबकि मेरा कोई दोष नहीं था ।* 

*द्रौपदी स्वयंवर में मेरा अपमान किया गया ।*

*माता कुंती ने मुझे आखिर में मेरा जन्म रहस्य बताया भी तो अपने अन्य बेटों को बचाने के लिए।* 

*जो भी मुझे प्राप्त हुआ है,* *दुर्योधन के दातृत्व से ही हुआ है ।*

*तो, अगर मैं उसकी तरफ से लड़ूँ तो मैं गलत कहाँ हूँ ?* 
*कृष्ण ने उत्तर दिया:*
*कर्ण, मेरा जन्म कारागार में हुआ ।*

*जन्म से पहले ही मृत्यु मेरी* *प्रतीक्षा में घात लगाए बैठा था।* 

*जिस रात मेरा जन्म हुआ, उसी रात मातापिता से दूर किया गया ।*

*तुम्हारा बचपन खड्ग, रथ, घोड़े, धनुष्य और बाण के बीच उनकी ध्वनि सुनते बीता । मुझे ग्वाले की गौशाला मिली, गोबर मिला और खड़ा होकर चल भी पाया उसके पहले ही कई प्राणघातक हमले झेलने पड़े ।* 
*कोई सेना नहीं, कोई शिक्षा नहीं। लोगों से ताने ही मिले कि उनकी समस्याओं का कारण मैं हूँ। तुम्हारे गुरु जब तुम्हारे शौर्य की तारीफ कर रहे थे, मुझे उस उम्र में कोई शिक्षा भी नहीं मिली थी।  जब मैं सोलह वर्षों का हुआ तब कहीं जाकर ऋषि सांदीपन के गुरुकुल पहुंचा ।*

 

*तुम अपनी पसंद की कन्या से विवाह कर सके ।*

*जिस कन्या से मैंने प्रेम किया वो मुझे नहीं मिली और उनसे विवाह करने पड़े जिन्हें मेरी चाहत थी या जिनको मैंने राक्षसों से बचाया था ।* 

*मेरे पूरे समाज को यमुना के किनारे से हटाकर एक दूर समुद्र के किनारे बसाना पड़ा,  उन्हें जरासंध से बचाने के लिए । रण से पलायन के कारण मुझे भीरु भी कहा गया ।* 
*कल अगर दुर्योधन युद्ध जीतता है तो तुम्हें बहुत श्रेय मिलेगा ।*
*धर्मराज अगर जीतता है तो मुझे क्या मिलेगा ?* 

*मुझे केवल युद्ध और युद्ध से निर्माण हुई समस्याओं के लिए दोष दिया जाएगा।* 

*एक बात का स्मरण रहे कर्ण -*

*हर किसी को जिंदगी चुनौतियाँ देती है, जिंदगी किसी के भी* *साथ न्याय नहीं करती। दुर्योधन ने अन्याय का सामना किया है तो युधिष्ठिर ने भी अन्याय भुगता है ।* 
*लेकिन सत्य धर्म क्या है यह तुम जानते हो ।*
*कोई बात नहीं अगर कितना ही अपमान हो, जो हमारा अधिकार है वो हमें ना मिल पाये…महत्व इस बात का है कि तुम उस समय उस संकट का सामना कैसे करते हो ।* 
*रोना धोना बंद करो कर्ण,*  *जिंदगी न्याय नहीं करती इसका मतलब यह नहीं होता कि तुम्हें अधर्म के पथ पर चलने की अनुमति है ।*

*जय श्री राम🌹जय श्री कृष्णा*

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