Gochar Transit

यदि गोचर मे सूर्य जनम राशी से इन भावो में हो तो इसका फल इस प्रकार होता है .

प्रथम भाव में – इस भाव में होने पर रक्त में कमी की सम्भावना होती है . इसके अलावा गुस्सा आता है पेट में रोग और कब्ज़ की परेशानी आने लगती है . नेत्र रोग , हृदय रोग ,मानसिक अशांति ,थकान और सर्दी गर्मी से पित का प्रकोप होने लगता है .इसके आलवा फालतू का घूमना , बेकार का परिश्रम , कार्य में बाधा ,विलम्ब ,भोजन का समय में न मिलना , धन की हानि , सम्मान में कमी होने लगती है परिवार से दूरियां बनने लगती है .

द्वितीय भाव में – इस भाव में सूर्य के आने से धन की हानि ,उदासी ,सुख में कमी , असफ़लत अ, धोका .नेत्र विकार , मित्रो से विरोध , सिरदर्द , व्यापार में नुकसान होने लगता है .

तृतीय भाव में – इस भाव में सूर्य के फल अच्छे होते है .यहाँ जब सूर्य होता है तो सभी प्रकार के लाभ मिलते है . धन , पुत्र ,दोस्त और उच्चाधिकारियों से अधिक लाभ मिलता है . जमीन का भी फायदा होता है . आरोग्य और प्रसस्नता मिलती है . शत्रु हारते हैं . समाज में सम्मान प्राप्त होता है .

चतुर्थ भाव – इस भाव में सूर्य के होने से ज़मीन सम्बन्धी , माता से , यात्रा से और पत्नी से समस्या आती है . रोग , मानसिक अशांति और मानहानि के कष्ट आने लगते हैं .

पंचम भाव – इस भाव में भी सूर्य परेशान करता है .पुत्र को परेशानी , उच्चाधिकारियों से हानि और रोग व् शत्रु उभरने लगते है .

६ ठे भाव में – इस भाव में सूर्य शुभ होता है . इस भाव में सूर्य के आने पर रोग ,शत्रु ,परेशानियां शोक आदि दूर भाग जाते हैं .

सप्तम भाव में – इस भाव में सूर्य यात्रा ,पेट रोग , दीनता , वैवाहिक जीवन के कष्ट देता है स्त्री – पुत्र बीमारी से परेशान हो जाते हैं .पेट व् सिरदर्द की समस्या आ जाती है . धन व् मान में कमी आ जाती है .

अष्टम भाव में – इस में सूर्य बवासीर , पत्नी से परेशानी , रोग भय , ज्वर , राज भय , अपच की समस्या पैदा करता है .

नवम भाव में – इसमें दीनता ,रोग ,धन हानि , आपति , बाधा , झूंठा आरोप , मित्रो व् बन्धुओं से विरोध का सामना करन पड़ता है .

दशम भाव में – इस भाव में सफलता , विजय , सिद्धि , पदोन्नति , मान , गौरव , धन , आरोग्य , अच्छे मित्र की प्राप्ति होती है .

एकादश भाव में – इस भाव में विजय , स्थान लाभ , सत्कार , पूजा , वैभव ,रोगनाश ,पदोन्नति , वैभव पितृ लाभ . घर में मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं .

द्वादश भाव में – इस भाव में सूर्य शुभ होता है .सदाचारी बनता है , सफलता दिलाता है अच्छे कार्यो के लिए , लेकिन पेट , नेत्र रोग , और मित्र भी शत्रु बन जाते हैं .

चन्द्र की गोचर भाव के फल

प्रथम भाव में – जब चन्द्र प्रथम भाव में होता है तो जातक को सुख , समागम , आनंद व् निरोगता का लाभ होता है . उत्तम भोजन ,शयन सुख , शुभ वस्त्र की प्राप्ति होती है .

द्वितीय भाव – इस भाव में जातक के सम्मान और धन में बाधा आती है .मानसिक तनाव ,परिवार से अनबन , नेत्र विकार , भोजन में गड़बड़ी हो जाती है . विद्या की हानि , पाप कर्मी और हर काम में असफलता मिलने लगती है .

तृतीय भाव में – इस भाव में चन्द्र शुभ होता है .धन , परिवार ,वस्त्र , निरोग , विजय की प्राप्ति शत्रुजीत मन खुश रहता है , बंधु लाभ , भाग्य वृद्धि ,और हर तरह की सफलता मिलती है .

चतुर्थ भाव में – इस भाव में शंका , अविश्वास , चंचल मन , भोजन और नींद में बाधा आती है .स्त्री सुख में कमी , जनता से अपयश मिलता है , छाती में विकार , जल से भय होता है .

पंचम भाव में – इस भाव में दीनता , रोग ,यात्रा में हानि , अशांत , जलोदर , कामुकता की अधिकता और मंत्रणा शक्ति में न्यूनता आ जाती है .

सिक्स्थ भाव में – इस भाव में धन व् सुख लाभ मिलता है . शत्रु पर जीत मिलती है .निरोय्गता ,यश आनंद , महिला से लाभ मिलता है .

सप्तम भाव में – इस भाव में वाहन की प्राप्ति होती है. सम्मान , सत्कार ,धन , अच्छा भोजन , आराम काम सुख , छोटी लाभ प्रद यात्रायें , व्यापर में लाभ और यश मिलता है .

अष्टम भाव में – इस भाव में जातक को भय , खांसी , अपच . छाती में रोग , स्वांस रोग , विवाद ,मानसिक कलह , धन नाश और आकस्मिक परेशानी आती है.

नवम भाव में – बंधन , मन की चंचलता , पेट रोग ,पुत्र से मतभेद , व्यापार हानि , भाग्य में अवरोध , राज्य से हानि होती है .

दशम भाव में – इस में सफलता मिलती है . हर काम आसानी से होता है . धन , सम्मान , उच्चाधिकारियों से लाभ मिलता है . घर का सुख मिलता है .पद लाभ मिलता है . आज्ञा देने का सामर्थ्य आ जाता है .

एकादश भाव में – इस भाव में धन लाभ , धन संग्रह , मित्र समागम , प्रसन्नता , व्यापार लाभ , पुत्र से लाभ , स्त्री सुख , तरल पदार्थ और स्त्री से लाभ मिलता है .

द्वादस भाव में – इस भाव में धन हानि ,अपघात , शारीरिक हानियां होती है .

मंगल ग्रह का प्रभाव गोचर में इस प्रकार से होता है.प्रथम भाव में जब मंगल आता है .तो रोग्दायक हो कर बवासीर ,रक्त विकार ,ज्वर , घाव , अग्नि से डर , ज़हर और अस्त्र से हानि देता है.

द्वतीय भाव में –यहाँ पर मंगल से पित ,अग्नि ,चोर से खतरा ,राज्य से हानि , कठोर वाणी के कारण हानि , कलह और शत्रु से परेशानियाँ आती है .

तृतीय भाव – इस भाव में मंगल के आ जाने से चोरो और किशोरों के माध्यम से धन की प्राप्ति होती है शत्रु डर जाते हैं . तर्क शक्ति प्रबल होती है. धन , वस्त्र , धातु की प्राप्ति होती है . प्रमुख पद मिलता है .

चतुर्थ भाव में – यहं पर पेट के रोग ,ज्वर , रक्त विकार , शत्रु पनपते हैं .धन व् वस्तु की कमी होने लगती है .गलत संगती से हानि होने लगती है . भूमि विवाद , माँ को कष्ट , मन में भय , हिंसा के कारण हानि होने लगती है .

पंचम भाव – यहाँ पर मंगल के कारण शत्रु भय , रोग , क्रोध , पुत्र शोक , शत्रु शोक , पाप कर्म होने लगते हैं . पल पल स्वास्थ्य गिरता रहता है .

छठा भाव – यहाँ पर मंगल शुभ होता है . शत्रु हार जाते हैं . डर भाग जाता हैं . शांति मिलती है. धन – धातु के लाभ से लोग जलते रह जाते हैं .

सप्तम भाव – इस भाव में स्त्री से कलह , रोग ,पेट के रोग , नेत्र विकार होने लगते हैं .

अष्टम भाव में – यहाँ पर धन व् सम्मान में कमी और रक्तश्राव की संभावना होती है .

नवम भाव – यहाँ पर धन व् धातु हानि , पीड़ा , दुर्बलता , धातु क्षय , धीमी क्रियाशीलता हो जाती हैं.

दशम भाव – यहाँ पर मिलाजुला फल मिलता हैं,

एकादश भाव – यहाँ मंगल शुभ होकर धन प्राप्ति ,प्रमुख पद दिलाता हैं.

द्वादश भाव – इस भाव में धन हानि , स्त्री से कलह नेत्र वेदना होती है .

बुध का गोचर में प्रभाव –

प्रथम भाव में – इस भाव में चुगलखोरी अपशब्द , कठोर वाणी की आदत के कारण हानि होती है .कलह बेकार की यात्रायें . और अहितकारी वचन से हानियाँ होती हैं .

द्वीतीय भाव में – यहाँ पर बुध अपमान दिलाने के बावजूद धन भी दिलाता है .

तृतीय भाव – यहाँ पर शत्रु और राज्य भय दिलाता है . ये दुह्कर्म की ओर ले जाता है .यहाँ मित्र की प्राप्ति भी करवाता है .

चतुर्थ भाव् – यहाँ पर बुध शुभ होकर धन दिलवाता है .अपने स्वजनों की वृद्धि होती है .

पंचम भाव – इस भाव में मन बैचैन रहता है . पुत्र व् स्त्री से कलह होती है .

छठा भाव – यहाँ पर बुध अच्छा फल देता हैं. सौभाग्य का उदय होता है . शत्रु पराजित होते हैं . जातक उन्नतशील होने लगता है . हर काम में जीत होने लगते हैं

सप्तम भाव – यहं पर स्त्री से कलह होने लगती हैं .

अष्टम भाव – यहाँ पर बुध पुत्र व् धन लाभ देता है .प्रसन्नता भी देता है .

नवम – यहाँ पर बुध हर काम में बाधा डालता हैं .

दशम भाव – यहाँ पर बुध लाभ प्रद हैं. शत्रुनाशक ,धन दायक ,स्त्री व् शयन सुख देता है .

एकादश भाव में – यहाँ भी बुध लाभ देता हैं . धन , पुत्र , सुख , मित्र ,वाहन , मृदु वाणी प्रदान करता है .

द्वादश भाव- यहाँ पर रोग ,पराजय और अपमान देता है

गुरु का गोचर प्रभाव- प्रथम भाव में =======

इस भाव में धन नाश ,पदावनति , वृद्धि का नाश , विवाद ,स्थान परिवर्तन दिलाता हैं .द्वितीय भाव में – यहाँ पर धन व् विलासता भरा जीवन दिलाता है .

तृतीय भाव में – यहाँ पर काम में बाधा और स्थान परिवर्तन करता है .

चतुर्थ भाव में – यहाँ पर कलह , चिंता पीड़ा दिलाता है .

पंचम भाव – यहाँ पर गुरु शुभ होता है .पुत्र , वहां ,पशु सुख , घर ,स्त्री , सुंदर वस्त्र आभूषण , की प्राप्ति करवाता हैं .

छथा भाव में – यहाँ पर दुःख और पत्नी से अनबन होती है.

सप्तम भाव – सैय्या , रति सुख , धन , सुरुचि भोजन , उपहार , वहां .,वाणी , उत्तम वृद्धि करता हैं .

अष्टम भाव – यहाँ बंधन ,व्याधि , पीड़ा , ताप ,शोक , यात्रा कष्ट , मृत्युतुल्य परशानियाँ देता है .

नवम भाव में – कुशलता ,प्रमुख पद , पुत्र की सफलता , धन व् भूमि लाभ , स्त्री की प्राप्ति होती हंत .

दशम भाव में- स्थान परिवर्तन में हानि , रोग ,धन हानि

एकादश भाव – यहाँ सुभ होता हैं . धन ,आरोग्य और अच्छा स्थान दिलवाता है .

द्वादश भाव में – यहाँ पर मार्ग भ्रम पैदा करता है .

मंगल ग्रह का प्रभाव गोचर में इस प्रकार से होता है.प्रथम भाव में जब मंगल आता है .तो रोग्दायक हो कर बवासीर ,रक्त विकार ,ज्वर , घाव , अग्नि से डर , ज़हर और अस्त्र से हानि देता है.

द्वतीय भाव में –यहाँ पर मंगल से पित ,अग्नि ,चोर से खतरा ,राज्य से हानि , कठोर वाणी के कारण हानि , कलह और शत्रु से परेशानियाँ आती है .

तृतीय भाव – इस भाव में मंगल के आ जाने से चोरो और किशोरों के माध्यम से धन की प्राप्ति होती है शत्रु डर जाते हैं . तर्क शक्ति प्रबल होती है. धन , वस्त्र , धातु की प्राप्ति होती है . प्रमुख पद मिलता है .

चतुर्थ भाव में – यहं पर पेट के रोग ,ज्वर , रक्त विकार , शत्रु पनपते हैं .धन व् वस्तु की कमी होने लगती है .गलत संगती से हानि होने लगती है . भूमि विवाद , माँ को कष्ट , मन में भय , हिंसा के कारण हानि होने लगती है .

पंचम भाव – यहाँ पर मंगल के कारण शत्रु भय , रोग , क्रोध , पुत्र शोक , शत्रु शोक , पाप कर्म होने लगते हैं . पल पल स्वास्थ्य गिरता रहता है .

छठा भाव – यहाँ पर मंगल शुभ होता है . शत्रु हार जाते हैं . डर भाग जाता हैं . शांति मिलती है. धन – धातु के लाभ से लोग जलते रह जाते हैं .

सप्तम भाव – इस भाव में स्त्री से कलह , रोग ,पेट के रोग , नेत्र विकार होने लगते हैं .

अष्टम भाव में – यहाँ पर धन व् सम्मान में कमी और रक्तश्राव की संभावना होती है .

नवम भाव – यहाँ पर धन व् धातु हानि , पीड़ा , दुर्बलता , धातु क्षय , धीमी क्रियाशीलता हो जाती हैं.

दशम भाव – यहाँ पर मिलाजुला फल मिलता हैं,

एकादश भाव – यहाँ मंगल शुभ होकर धन प्राप्ति ,प्रमुख पद दिलाता हैं.

द्वादश भाव – इस भाव में धन हानि , स्त्री से कलह नेत्र वेदना होती है .

बुध का गोचर में प्रभाव –

प्रथम भाव में – इस भाव में चुगलखोरी अपशब्द , कठोर वाणी की आदत के कारण हानि होती है .कलह बेकार की यात्रायें . और अहितकारी वचन से हानियाँ होती हैं .

द्वीतीय भाव में – यहाँ पर बुध अपमान दिलाने के बावजूद धन भी दिलाता है .

तृतीय भाव – यहाँ पर शत्रु और राज्य भय दिलाता है . ये दुह्कर्म की ओर ले जाता है .यहाँ मित्र की प्राप्ति भी करवाता है .

चतुर्थ भाव् – यहाँ पर बुध शुभ होकर धन दिलवाता है .अपने स्वजनों की वृद्धि होती है .

पंचम भाव – इस भाव में मन बैचैन रहता है . पुत्र व् स्त्री से कलह होती है .

छठा भाव – यहाँ पर बुध अच्छा फल देता हैं. सौभाग्य का उदय होता है . शत्रु पराजित होते हैं . जातक उन्नतशील होने लगता है . हर काम में जीत होने लगते हैं

सप्तम भाव – यहं पर स्त्री से कलह होने लगती हैं .

अष्टम भाव – यहाँ पर बुध पुत्र व् धन लाभ देता है .प्रसन्नता भी देता है .

नवम – यहाँ पर बुध हर काम में बाधा डालता हैं .

दशम भाव – यहाँ पर बुध लाभ प्रद हैं. शत्रुनाशक ,धन दायक ,स्त्री व् शयन सुख देता है .

एकादश भाव में – यहाँ भी बुध लाभ देता हैं . धन , पुत्र , सुख , मित्र ,वाहन , मृदु वाणी प्रदान करता है .

द्वादश भाव- यहाँ पर रोग ,पराजय और अपमान देता है

गुरु का गोचर प्रभाव- प्रथम भाव में =======

इस भाव में धन नाश ,पदावनति , वृद्धि का नाश , विवाद ,स्थान परिवर्तन दिलाता हैं .द्वितीय भाव में – यहाँ पर धन व् विलासता भरा जीवन दिलाता है .

तृतीय भाव में – यहाँ पर काम में बाधा और स्थान परिवर्तन करता है .

चतुर्थ भाव में – यहाँ पर कलह , चिंता पीड़ा दिलाता है .

पंचम भाव – यहाँ पर गुरु शुभ होता है .पुत्र , वहां ,पशु सुख , घर ,स्त्री , सुंदर वस्त्र आभूषण , की प्राप्ति करवाता हैं .

छथा भाव में – यहाँ पर दुःख और पत्नी से अनबन होती है.

सप्तम भाव – सैय्या , रति सुख , धन , सुरुचि भोजन , उपहार , वहां .,वाणी , उत्तम वृद्धि करता हैं .

अष्टम भाव – यहाँ बंधन ,व्याधि , पीड़ा , ताप ,शोक , यात्रा कष्ट , मृत्युतुल्य परशानियाँ देता है .

नवम भाव में – कुशलता ,प्रमुख पद , पुत्र की सफलता , धन व् भूमि लाभ , स्त्री की प्राप्ति होती हंत .

दशम भाव में- स्थान परिवर्तन में हानि , रोग ,धन हानि

एकादश भाव – यहाँ सुभ होता हैं . धन ,आरोग्य और अच्छा स्थान दिलवाता है .

द्वादश भाव में – यहाँ पर मार्ग भ्रम पैदा करता है .

गोचर शुक्र का प्रथम भाव में प्रभाव –जब शुक्र यहाँ पर अथोता है तब सुख ,आनंद ,वस्त्र , फूलो से प्यार , विलासी जीवन ,सुंदर स्थानों का भ्रमण ,सुगन्धित पदार्थ पसंद आते है .विवाहिक जीवन के लाभ प्राप्त होते हैं .

द्वीतीय भाव में – यहाँ पर शुक्र संतान , धन , धान्य , राज्य से लाभ , स्त्री के प्रति आकर्षण और परिवार के प्रति हितकारी काम करवाता हैं.

तृतीय भाव – इस जगह प्रभुता ,धन ,समागम ,सम्मान ,समृधि ,शास्त्र , वस्त्र का लाभ दिलवाता हैं .यहाँ पर नए स्थान की प्राप्ति और शत्रु का नास करवाता हैं .

चतुर्थ भाव –इस भाव में मित्र लाभ और शक्ति की प्राप्ति करवाता हैं .

पंचम भाव – इस भाव में गुरु से लाभ ,संतुष्ट जीवन , मित्र –पुत्र –धन की प्राप्ति करवाता है . इस भाव में शुक्र होने से भाई का लाभ भी मिलता है.

छठा भाव –इस भाव में शुक्र रोग , ज्वर ,और असम्मान दिलवाता है .

सप्तम भाव – इसमें सम्बन्धियों को नास्ता करवाता हैं .

अष्टम भाव – इस भाव में शुक्र भवन , परिवार सुख , स्त्री की प्राप्ति करवाता है .

नवम भाव- इसमें धर्म ,स्त्री ,धन की प्राप्ति होती हैं .आभूषण व् वस्त्र की प्राप्ति भी होती है .

दशम भाव – इसमें अपमान और कलह मिलती है.

एकादश भाव – इसमें मित्र ,धन ,अन्न ,प्रशाधन सामग्री मिलती है .

द्वादश भाव – इसमें धन के मार्ग बनते हिया परन्तु वस्त्र लाभ स्थायी नहीं होता हैं .

शनि की गोचर दशा

प्रथम भाव – इस भाव में अग्नि और विष का डर होता है. बंधुओ से विवाद , वियोग , परदेश गमन , उदासी ,शरीर को हानि , धन हानि ,पुत्र को हानि , फालतू घोमना आदि परेशानी आती है .

द्वितीय भाव – इस भाव में धन का नाश और रूप का सुख नाश की ओर जाता हैं .

तृतीय भाव – इस भाव में शनि शुभ होता है .धन ,परवर ,नौकर ,वहां ,पशु ,भवन ,सुख ,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है .सभी शत्रु हार मान जाते हैं .

चतुर्थ भाव –इस भाव में मित्र ,धन ,पुत्र ,स्त्री से वियोग करवाता हैं .मन में गलत विचार बनने लगते हैं .जो हानि देते हैं .

पंचम भाव – इस भाव में शनि कलह करवाता है जिसके कारण स्त्री और पुत्र से हानि होती हैं .

छठा भाव – ये शनि का लाभकारी स्थान हैं. शत्रु व् रोग पराजित होते हैं .सांसारिक सुख मिलता है .

सप्तम भाव – कई यात्रायें करनी होती हैं . स्त्री – पुत्र से विमुक्त होना पड़ता हैं .

अष्टम भाव – इसमें कलह व् दूरियां पनपती हैं.

नवम भाव – यहाँ पर शनि बैर , बंधन ,हानि और हृदय रोग देता हैं .

दशम भाव – इस भाव में कार्य की प्राप्ति , रोज़गार , अर्थ हानि , विद्या व् यश में कमी आती हैं

एकादश भाव – इसमें परस्त्री व् परधन की प्राप्ति होई हैं .

द्वादश भाव – इसमें शोक व् शारीरिक परेशानी आती हैं .

Why do you hesitate to learn astrology?

Jyotish PracticeWhy do you hesitate to learn astrology?

It is very lucky to see your horoscope or show it to an astrologer.
How many people do not get this opportunity during their lifetime, or their horoscope is not seen.
Every person in South India knows their constellation etc. Whereas in North India and other countries of the world, people do not get this good fortune.
In marriages, marriages etc., people get necessary horoscope matching or Muhurta, but they do nothing more than that.
Luck and karma are considered equal.
Therefore, you should take help of astrology.

Astro Himanshu Bio

Astro Himanshu Tiwari

is educated in technical education from UP Technical University now Dr. A.P.J. Abdul Kalam Technical University (APJAKTU)

Himanshu’s formal education includes:

Himanshu has offered astrological readings and divinations since 2006.

Himanshu’s astrology uses traditional Jyotisha techniques from Varanasi, India Panchang. His readings are philosophically influenced by classical Western thought as well as Hindu Brahmin precepts.

  • Born 28-July-1982
  • in Queen Mary Hospital, Lucknow (UP), India
  • at 11:15 a.m. *Indian Standard Time* 

Guru Mangal yoga

कई ब्रदरली फिगर

महान नाम और प्रसिद्धि प्राप्त करने की संभावना, व्यक्ति की सार्वजनिक प्रशंसा। इस योग वाले व्यक्ति अत्यधिक सीख सकते हैं और दार्शनिक मन के होते हैं।

भाइयों का बैंड

श्री बृहस्पति एक बहु गुणक है, कई और बहुत से उत्पादन करता है।

मंगला भाइयों, भाइयों-बहनों, योद्धाओं, चैम्पियनशिप, प्रतियोगियों, इंजीनियरों, अन्वेषकों, खोजकर्ताओं, और उन लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो एक निवर्तमान, आगे बढ़ने वाले आर्य विजय ऊर्जा का प्रदर्शन करते हैं।

जब गुरु और मंगला का मेल कई भाई-आंकड़े पैदा करता है जैसे कि साथी योद्धा। आमतौर पर ये भ्रातृ एजेंट (कुजा) सिद्धांत (गुरु) के तत्वावधान में कार्य करते हैं।

“आपके कई अच्छे संबंध हैं और विभिन्न महान गुणों से संपन्न हैं।
आप जो भी शुरू करते हैं, उसके लिए आप खुद को लगन से लगाते हैं।

आप सुंदर नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से जीवित हैं।

विदेशी भूमि में परेशानी। ”

12 साल बाद गुरु अपने घर में

व्यापक विश्वदृष्टि, समावेशी विविधता का सिद्धांत

आयात-निर्यात व्यापार (esp। शिक्षण सामग्री)

विदेशी भूमि में काम करते हैं,

मंदिरों में सेवा कार्य

बहुत दर्शन, मानवतावादी विश्वास

दार्शनिक हठधर्मिता और विश्व यात्रा के माध्यम से मानव विकास में विश्वास

वैश्विक मानवतावाद का उपजाऊ विस्तार * सिद्धांत * सिद्धांत

विश्वविद्यालय और शिक्षण-मंदिर के वातावरण का प्रसार

समझने की अनुमति

महान पर्वत मेरु से बुद्धि

धनुष्य = बृहस्पति का प्राकृतिक परिसर * स्वक्षेत्र * (क्षात्र = क्षेत्र, क्षेत्र, परिसर)। धनुष गुरु प्रोफेसर गुरु की यात्रा के लिए एक अत्यंत उपयुक्त और वर्चस्व का वातावरण है।

विश्वविद्यालय
पर्वतीय वातावरण

थिंक-टैंक, सैद्धांतिक प्रवचन वातावरण

संग बैठक स्थल

सीखने के मंदिर (लेकिन अनुष्ठान के लिए मंदिर नहीं, जो भाव -4 हैं)

सभ्यताओं के बीच ब्रिजवे कनेक्शन के लिए पोर्टल्स

देह-गृह-रिश्तों-काम की अपनी निजी दुनिया के भीतर, सिद्धांत की एक बड़ी मात्रा राजसी सिद्धांत, हठधर्मिता और उच्च परिप्रेक्ष्य के माध्यम से मार्गदर्शन बोलने के लिए ज्ञान जागरूकता को खोलती है।

गुरु-धनुषा से लौकिक धारणाओं का विकास होता है। बृहस्पति भावांतर के मामलों के दायरे का विस्तार करता है। गुरु-धनुष विशेष रूप से पितृ-पिता के माध्यम से सिखाते हैं और वे संरक्षक की भूमिका में हैं, जैसे कि बहुत ही आर्थिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त या राजाओं के वंश (5 वें-से-5 वें)।

विश्वविद्यालय और भूमंडलीकृत मानवतावादी वातावरण सीखने के मंदिरों, मठों के महान नेटवर्क और मानव और उन दिव्य प्रकृति के परस्पर संवाद सहित मंदिरों के पसंदीदा (आंतरिक और बाहरी) हैं।

सोने की खनक, महान शिक्षकों की तस्वीरें, धूप और पवित्र पुस्तकें धन्य हैं। धानुस के माध्यम से गुरु के पारगमन के दौरान उन्नत छात्रों के लिए छात्रवृत्ति निधि की चैरिटी का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है

बुध महादशा

17 years of disciplined apprenticeship toward mastery of the craft

बुध विशेष रूप से वाणिज्यिक और प्रशासनिक मानसिक गतिविधि का आनंद लेते हैं।

 

Mahadasha of Budha = typically quite mentalized throughout its 17 years duration . Budha particularly enjoys commercial and administrative mental activity.

 

Shri Budha lord of communication enjoys reading, writing, speaking, listening, and grammar. He thinks about cadence, prosody, rhythm, intonation, syllable stress, the interest of the audience (hearing, 3) and author’s intent.

 

practical daily communications skills.

 

also expect some hostility (6) and logical arguments (6) both mental and physical, both internal and external. These can be handled with compassion and intelligence; nevertheless they must be encountered and managed.

 

work with siblings, students and adolescents, either gender; (Budha = gender-neutral)

कुम्भ राशि पर 18 साल बाद, बहुत शक्तिशाली, उच्च के राहु का प्रभाव

कुम्भ राशि पर 18 साल बाद, बहुत शक्तिशाली, उच्च के राहु का प्रभाव

Professor Rahu’s classroom transits via radical Bhava 5

Risk-rewarding Rahu

Hunger to Possess fame, celebrity

brings foreigners and exotic cultural influence into politics, children, theatrical performance, the center of one’s attention, literature and fashion

Intense temporary fascination with children, creativity, theatre, center-stage roles, celebrity genius games, glitter, glamour.

Risk-rewarding Rahu attempts and will generally succeed in temporary attainment of a higher level of recognition yielding empowerments in matters of :

creative and performance arts, literature, fashion

politics, theatre, celebrity

poetry, literature, romance”falling in love”

speculative financial ventures, gambling

philosophical wisdom of the father

the mother’s speculative investments, the mother’s gambles, the mother’s amusements

राहु जोखिम द्रष्टि

Bhava-9 * world travel; ideologies and principled beliefs; universities and scholarship; priest, preacher, professor, guru and father-figure * Professor Rahu likes to challenge the accepted limits of doctrine and indoctrinators.

Sthana 11 * friends, networks, economic income, social-material goals. Professor Rahu likes to challenge or break the conventional limits on normalized social networks and goal-achievement. Brings exotic persons and taboo-breaking marketplace behaviors into the associative network.

Bhava-1 * flesh-shell and its social attributes, physical appearance, vitality. Professor Rahu likes to challenge or break limits on the conventional social personality and physical appearance. Under Rahu’s influence, one adds exotic qualities to the inventory of personality attributes.

राहु इस चिन्ह में अपने उच्चाटन में है, और इसलिए बहुत शक्तिशाली है।

यह बहुत चिंता और परेशानी के बाद जीत का संकेत देता है।

इस जीवन की अधिकांश ऊर्जा को संचार की कला में निपुण होना सीखें

यह सफलता का टोकन है, और भाग्य जो अक्सर सब कुछ खो जाने पर ही आता है।

देशी को घेरने वाले दोस्त विश्वसनीय होते हैं, और उसे सफल होने में मदद करेंगे।

मूल निवासी के पास एक महान दिमाग है, जो हमेशा उसे वर्तमान के खिलाफ लड़ने में सक्षम करेगा; लेकिन विश्वास और दृढ़ता भी आवश्यक है।

साहस नहीं चाह रहा है; और यह स्थिति मूल निवासी को अच्छा और सीधा बनाती है।

वह जानता होगा कि लोगों की सहानुभूति कैसे हासिल की जाए जो उसकी मदद करेगा: इसलिए वह सीधे आगे देख सकता है, क्योंकि मिथुन राशि में राहु हमेशा प्रगति का संकेत है।

मिथुन राशि में राहु बहुमुखी प्रतिभा, अनुकूलन क्षमता और मानसिक चपलता को बढ़ाता है। जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण के कारण रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से लाभ। इस जीवन में इस तरह के दृष्टिकोण की खेती की जानी चाहिए।

मीन राशि पर 18 साल बाद, बहुत शक्तिशाली, उच्च के राहु का प्रभाव

मीन राशि पर 18 साल बाद, बहुत शक्तिशाली, उच्च के राहु का प्रभाव

Professor Rahu’s classroom transits via radical Bhava 4

Risk-rewarding Rahu

brings exotic foreigners and outside cultural influence into the schoolroom, the garden, the coastline, the kitchen, the boundaried nation-state

Amplifies one’s ability and desire to own, shelter and protect exotic, dangerous, or unusual lands, vehicles, and buildings that challenge existing cultural categories.

Professor Rahu attempts and will generally succeed in temporary attainment of a higher level of recognition yielding empowerments in matters of :

property ownership, real-estate, houses, buildings, vehicles, lands

rhythmic habits, Old Ways, ethnicity, folkways,

schooling, examinations, diploma, license

patriotism, defense of the land, nationalism, passport

childhood home, familiarity, nurturing, caretaking, security

राहु जोखिम द्रष्टि

Bhava-8 * secret, suddenly new identity, emergencies, inheritance * Professor Rahu likes to challenge or break the usual limits on confidential knowledge * outbreak of scandal

Bhava-10 * social leadership, public reputation, regulation and law * Professor Rahu likes to challenge or break the normal; cautions on protecting public reputation, maintaining respect

Bhava-12 * imagination, retreat, bedroom, dreams, astral realm * Professor Rahu likes to challenge or break the accepted; limits upon astral bridge crossing, dream interpretation, research protocols, private bedroom activities, and meditation practice. Rahu challenges conventional bedroom behavior and brings exotic influences into sanctuary envirnments.

राहु इस चिन्ह में अपने उच्चाटन में है, और इसलिए बहुत शक्तिशाली है।

यह बहुत चिंता और परेशानी के बाद जीत का संकेत देता है।

इस जीवन की अधिकांश ऊर्जा को संचार की कला में निपुण होना सीखें

यह सफलता का टोकन है, और भाग्य जो अक्सर सब कुछ खो जाने पर ही आता है।

देशी को घेरने वाले दोस्त विश्वसनीय होते हैं, और उसे सफल होने में मदद करेंगे।

मूल निवासी के पास एक महान दिमाग है, जो हमेशा उसे वर्तमान के खिलाफ लड़ने में सक्षम करेगा; लेकिन विश्वास और दृढ़ता भी आवश्यक है।

साहस नहीं चाह रहा है; और यह स्थिति मूल निवासी को अच्छा और सीधा बनाती है।

वह जानता होगा कि लोगों की सहानुभूति कैसे हासिल की जाए जो उसकी मदद करेगा: इसलिए वह सीधे आगे देख सकता है, क्योंकि मिथुन राशि में राहु हमेशा प्रगति का संकेत है।

मिथुन राशि में राहु बहुमुखी प्रतिभा, अनुकूलन क्षमता और मानसिक चपलता को बढ़ाता है। जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण के कारण रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से लाभ। इस जीवन में इस तरह के दृष्टिकोण की खेती की जानी चाहिए।

मकर राशि पर 18 साल बाद, बहुत शक्तिशाली, उच्च के राहु का प्रभाव

मकर राशि पर 18 साल बाद, बहुत शक्तिशाली, उच्च के राहु का प्रभाव

Professor Rahu’s classroom transits via radical Bhava 6

Risk-rewarding Rahu

Hunger to Possess drugs and medicines, servants and animals, imbalanced and adversarial relationships. Attracted to underclass and outcast persons.

brings foreigners and exotic cultural influence into the place of service, the medical clinic, the offices of litigators and accusers.

Professor Rahu attempts and will generally succeed in temporary attainment of a higher level of recognition yielding empowerments in matters of:

seva , human services ministries
logical argumentation
complaints, accusations, conflict, animosity, divorce
illness, medicines, physicians, disease, toxicity, pollution
employees, slaves, “human resources”
valuable goods and conserved knowledge of the children
voice and face, teeth, mouth of the Children

Temporary increase in one’s “Desire to Engage in Argumentative Conflict”

राहु जोखिम द्रष्टि

Bhava-10 * social leadership, public reputation, regulation and laws * Professor Rahu likes to challenge or break the usual cautions on protecting public reputation, maintaining respect

Bhava-12 * imagination, retreat, dreams, bedroom, astral realm * Professor Rahu likes to challenge or break the usual limits on astral bridge crossing, dream interpretation, research protocols, and meditation practice. Rahu challenges bedroom behavior and brings exotic influences into private relationships.
Bhava-2 * family, wealth, knowledge, face, voice, speech * Professor Rahu likes to challenge or break the usual limits on acquisitions, and lineage values. One is inclined to take more risk with matters of family approval, financial hoards, and with the long-term value of what one says.

राहु इस चिन्ह में अपने उच्चाटन में है, और इसलिए बहुत शक्तिशाली है।

यह बहुत चिंता और परेशानी के बाद जीत का संकेत देता है।

इस जीवन की अधिकांश ऊर्जा को संचार की कला में निपुण होना सीखें

यह सफलता का टोकन है, और भाग्य जो अक्सर सब कुछ खो जाने पर ही आता है।

देशी को घेरने वाले दोस्त विश्वसनीय होते हैं, और उसे सफल होने में मदद करेंगे।

मूल निवासी के पास एक महान दिमाग है, जो हमेशा उसे वर्तमान के खिलाफ लड़ने में सक्षम करेगा; लेकिन विश्वास और दृढ़ता भी आवश्यक है।

साहस नहीं चाह रहा है; और यह स्थिति मूल निवासी को अच्छा और सीधा बनाती है।

वह जानता होगा कि लोगों की सहानुभूति कैसे हासिल की जाए जो उसकी मदद करेगा: इसलिए वह सीधे आगे देख सकता है, क्योंकि मिथुन राशि में राहु हमेशा प्रगति का संकेत है।

मिथुन राशि में राहु बहुमुखी प्रतिभा, अनुकूलन क्षमता और मानसिक चपलता को बढ़ाता है। जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण के कारण रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से लाभ। इस जीवन में इस तरह के दृष्टिकोण की खेती की जानी चाहिए।